सेंटर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियन (सीटू) का आठवां छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मेलन का आज लौह नगरी दल्ली राजहरा में जोशीले अंदाज में आगाज हुआ ।
सम्मेलन का आयोजन दल्ली राजहरा में 1 फरवरी से 3 फरवरी तक किया जा रहा है, । जिसकी शुरुआत आज सीटू के राज्य अध्यक्ष के एस एन बनर्जी के द्वारा सभा स्थल सिंधु भवन में झंडा फहराकर किया गया । इसके पश्चात सदस्यों ने शहीद बेदी पर पुष्प अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी । इसके बाद जैन भवन चौक से विशाल जुलूस निकाला गया। जिसमें लगभग 800 से अधिक सीटू के कार्यकर्ताओं ने अपनी भागीदारी निभाई । जो कि जैन भवन चौक से गुप्ता चौक होते हुए शहीद शंकर गुहा नियोगी चौक , श्रम वीर चौक होते हुए वापस सभा स्थल पहुंचे जहां जुलूस आम सभा में परिवर्तित हो गया ।
आमसभा के मुख्य अतिथि कामरेड तपन सेन उपाध्यक्ष आल इंडिया सीटू, विशिष्ट अतिथि एस.एस बनर्जी (अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सीटू ) का० एम.के. नंदी (महासचिव छ.ग. सीटू), काम. धर्मराज महापात्रा (सचिव छत्तीसगढ़ सीटू ), का० . एम. एस. शांत कुमार, काम. बी. एम मनोहर का. केपीजी पाणिकर संस्थापक सदस्य सीटू राजहरा थे। आमसभा में केंद्र सरकार के मजदूर विरोधी नीति और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए लाये जा रहे श्रम कानून में संशोधन के खिलाफ आवाज उठाई गई। कहा गया कि केंद्र सरकार कहती है, कि यह श्रम कानून मजदूर हितैषी है, लेकिन तह में जाएं, तो हर बातें मजदूरों को बंधुवा मजदूर बनाने की दिशा में कदम है ।
*कामरेड तपन सेन* ने कहा कि आज की स्थिति में संघर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण है । हमें संघर्ष के मैदान में टिके रहना है तो संघर्ष में तेजी लाना होगा। हमें लेबर कोड का विरोध करना होगा । सरकार ने यूनियन को बुलाकर कहा कि बहुत खराब स्थिति है, लेबर कोड का विरोध मत करिए। लेकिन सरकार के नीति के खिलाफ हम लोग हड़ताल अवश्य करेंगे । राष्ट्रीय स्तर पर पूरे यूनियन मिलकर ऐलान किया है कि हड़ताल होगा । बिजली का निजीकरण आंगनबाड़ी मजदूर की कई मुद्दे हमारे मांग में है ।
जिनके खिलाफ हम लड़ रहे हैं, जो दादागिरी कर रहे हैं यह उसकी ताकत का नहीं, कमजोरी का प्रतीक है। सरकार कह रही है कि लेबर कोड सभी कर्मचारियों को कवर में लायेगा। लेकिन फैक्ट्री में पहले जो 10 मजदूरों पर कवरेज था उसे बढाकर 30 से 40 तक कर दिया गया है । मजदूरों की छटनी के लिए अब मालिकों को सरकार से परमीशन लेने की आवश्यकता नहीं होगा। पहले लिमिट था कि 100 तक मजदूर वाले संस्था में यह लागू होता था,उसे बढाकर 300 कर दिया है । क्या सरकार मजदूरों को कवर कर रही है । हमारे हिसाब से 80% मजदूर श्रम कानून से बाहर हो जाएंगे इन्हें बाहर फेंक दिया जाएगा । मतलब सिर्फ मालिक की मनमानी चलेगी । हम यह सब होने नहीं देंगे । यदि खदानों में, कारखानों में मजदूर जेब में हाथ रख कर बैठ जाएंगे तो कोई भी कंपनी नहीं चल सकता । इन्हीं विषयों पर 9 जुलाई की हडताल में देश के मजदूरों ने यह साबित कर दिया कि हम पीछे नहीं हटेंगे।
फिर भी सरकार ने हठधर्मिता से लेबर कोड लागू करने का एलान कर दिया। इसलिए मजदूरों को गुलाम बनाने वाले नये लैबर कोड के खिलाफ हमें 12 फरवरी की हडताल को हर हाल में सफल करना होगा।
एस एन बनर्जी ने कहा*
कि लौह नगरी दल्ली राजहरा संघर्षों की नगरी है यहां कई मजदूर आंदोलन हुए जो इतिहास में दर्ज हुए हैं । ऐसे नगर में सभा को संबोधित करने में मैं गर्व महसूस कर रहा हूं । आज केंद्र सरकार ने पूरे मेहनतकशों के खिलाफ कारपोरेट जगत के पक्ष में लगातार निर्णय लेती जा रही है और उनको रोकने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा है ।बहुत ही विषम परिस्थितियों निर्मित हो रही है मेहनतकश देख रहा है कि यह क्या हो रहा है । इस देश में आपने देखा होगा किसानों के खिलाफ केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून लाए थे । जिसका किसानों ने पूरा जोर लगाकर विरोध किया । अन्ततः सरकार को कृषि कानून रद्द करना पड़ा । अब वे मजदूरों के खिलाफ चार श्रम कानून को पारित किया है ।अचानक 21 नवम्बर की रात को बताया गया कि इस देश में श्रम कानून लागू हो गया है । वेतन से लेकर कार्य स्थल की स्थिति और महिलाओं की दशा तक को खराब करने में तुली है स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ भी सरकार खिलवाड़ कर रही है । इसलिए तीखा संघर्ष जरूरी है।
*कामरेड धर्मराज महापात्र*
ने कहा कि 1886 से शुरु हुए संघर्ष के बाद जो अधिकार मजदूरों ने प्राप्त किए हैं सरकार उन अधिकारों को खत्म करने की साजिश क्यों कर रही है ..? सरकार से श्रम कानूनों को हमने कुर्बानियों से हासिल किया है। हमें भीख में नहीं मिला है। न्यूनतम वेतन, ग्रेजविटी, भविष्य निधि, कर्मचारी की आजीविका का अधिकार मेहनतकशों ने जो भी अधिकार हासिल किया यह संघर्ष और लाल झंडे की कुर्बानियों से मिली है । हमने संघर्ष किया है लेकिन आज देश की सत्ता में बैठे लोग एक ऐसी नीतियां बना रहे हैं जो हमारे अधिकारों को कमजोर कर पूंजीवाद को मजबूत कर रही हैं। 12 फरवरी को छत्तीसगढ़ में हड़ताल होगी और राजहरा बंद होगा और हम यह ऐलान करते हैं की यह धरती धनवानों की नहीं है, यह मजदूर और किसानो की है । मोदी और भाजपा से ही हिन्दुस्तान नहीं बनता
यहां के सैकड़ो मजदूर और किसानो के मेहनत से हिन्दुस्तान है। मध्यान भोजन में काम करने, आंगनवाड़ी में काम करने वाले कार्यकर्ता और सहायिकाएं विभिन्न क्षेत्र के खदानों में काम करने वाले सब पर हमले जारी हैं ।
दल्ली राजहरा के इस धरती से जो सम्मेलन का आह्वान होगा उसकी आवाज सिर्फ छत्तीसगढ़ में नहीं बल्कि पूरे भारत देश के कोने-कोने तक पहुंचेगी। ।
इस सम्मेलन में सीटू दल्ली राजहरा के संस्थापक सदस्य कामरेड के पी जी पाणिकर का साल एवं श्रीफल देकर सम्मान किया गया ।
सीटू का यह सम्मेलन कई मायने में महत्व रखता है जहां केंद्र सरकार की नीतियों से मजदूर वर्ग शोषण की कगार पर जा रहा है, वही पूंजीपतियों और मालिकों को लूट की छूट दी जा रही है।
जिससे खिलाफ 12 फरवरी को देश की ट्रेड यूनियनों के द्वारा हड़ताल किया जाएगा ।
सम्मेलन को सफल बनाने मेंआयोजन समिति के अध्यक्ष एम एस शांतकुमार, दल्ली राजहरा के कामरेड ज्ञानेंद्र सिंह प्रकाश सिंह क्षत्रिय पुरुषोत्तम सिमैया विनोद मिश्रा एवं पूरे सीटू के सदस्यों का संपूर्ण योगदान रहा जो तीन दिवसीय सम्मेलन को सफल बनाने में लगे हुए हैं ।
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